
मुख्यमंत्री आवास घेराव से पहले देहरादून में बवाल — पुलिस और शिक्षकों में धक्का-मुक्की, महिला शिक्षक बहनों का जोश, नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया गया

देहरादून/रुड़की — राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की लंबित मांगों को लेकर चल रहा चरणबद्ध आंदोलन आज ऐतिहासिक और उग्र रूप में सामने आया। सुबह से ही सैकड़ों शिक्षक देहरादून पहुँचे और मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए रैली निकालने लगे। जैसे ही रैली सचिवालय मार्ग की ओर बढ़ी, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।
इस दौरान पुलिस और शिक्षकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो धक्का-मुक्की में बदल गई। कई शिक्षक और पुलिसकर्मी गिर पड़े, जिससे कुछ को हल्की चोटें आईं। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस बल को मौके पर बुलाया।
महिला शिक्षकों का नेतृत्व

इस आंदोलन में महिला शिक्षक बहनों का उत्साह देखते ही बनता था।
वे अपने हक और सरकार विरोधी नारों के साथ सबसे आगे रहीं।
कई बार प्रशासन से सीधा टकराव हुआ, लेकिन शिक्षिकाएँ बिना डरे नारेबाजी करती रहीं। उनकी एकजुटता और दृढ़ संकल्प को देखकर प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
* *”जब जब शिक्षक बोला है, सिंहासन डोला है,”*
— इस नारे से देहरादून की सड़कों पर गूंज गूँजने लगी।
सुबह से ही देहरादून की गलियों और मुख्य मार्गों पर भारी तादाद में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात थे। उनका उद्देश्य किसी भी तरह गतिरोध को टालना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। लेकिन जब भीड़ बढ़ी, प्रशासन की सभी तैयारियों के बावजूद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस बल को देखकर आंदोलनकारियों का उत्साह और भी बढ़ गया और सरकार विरोधी नारे तेज हो गए। शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें
1. प्रधानाचार्य सीधी भर्ती नियमावली को निरस्त करना।
2. शत-प्रतिशत पदोन्नति (Promotion) लागू करना।
3. . स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता और सुधार।
संघ का आंदोलन 18 अगस्त से लगातार चल रहा है। आज के प्रदर्शन में सरकार को अंतिम चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो कल 17 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव और भी वृहद और उग्र होगा।
पहाड़ों से उमड़ा आक्रोश
बरसात और आपदा के कारण टूटे रास्तों के बावजूद, हरिद्वार जनपद के 6 ब्लॉकों से शिक्षक भारी संख्या में देहरादून पहुँचे। पहाड़ की सुंदर वादियों से निकलकर शिक्षक अपने अधिकार की लड़ाई के लिए राजधानी की सड़कों पर उतरे।
यह आक्रोश साफ दिखा कि अब शिक्षक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
पुलिस और शिक्षकों के बीच लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने शिक्षक नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता में शिक्षक नेताओं ने अपनी तीनों प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ठोस आश्वासन नहीं मिला तो कल का आंदोलन ऐतिहासिक और उग्र होगा।
आज के CM आवास घेराव कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला मंत्री विवेक सैनी, जिलाध्यक्ष लोकेश कुमार, अनिता वर्मा, मीनाक्षाशी सैनी, बबीता चौहान, दुर्गेश नंदिनी, तेजपाल यादव, ललित मोहन जोशी, विकास शर्मा, त्रिभुवन सैनी, प्रदीप कुमार, मान सिंह, लाल सिंह, सुशील चौधरी, राजकुमार सैनी, रविंद्र ममगाई, गजेन्द्र चौधरी, हरेन्द्र सैनी, दिनेश वर्मा, पवन राणा, सुतेद्र कुमार, सतीश सैनी, डा. नवीन सैनी, सुबोध नैन, विशाल पासवान, योगेश कुमार, अजय सैनी, वीरेन्द्रपाल, संदीप कपिल, सपना रानी, ओमप्रकाश सोनकार, शहीद अहमद, कौसर जहाँ, गजेन्द्र सिंघल, अर्चना चौधरी, ऐशपाल पाल सिंह, प्रमोद कपरवान, मनोज पांचाल, नीलम कोहली, प्रवीण जटराणा, अनीता चौधरी, शैलेन्द्र गौड, योगराज सिंह, सुनील गुप्ता, विनीत सैनी, प्रमिल कुमार, मनोज धीमान, संतोषी रावत, ऊषा रानी, प्रकाश देवराड़ी, विकास ज्वाडी, राजकुमार, अलका घनशाला, शहुल त्यागी, सुशील रमन, जयकृत रावत, प्रशान्त बडोला, हरदेव विष्ट, रोशनलाल, गजेन्द्र राजपूत, चरण सिंह, प्रेमप्रकाश जोशी, विकास जोशी, सदाशिव भास्कर, जगदीश जोशी, सुखदेव सैनी , गीता कठैत, देवेन्द्र पाल, आरती भट्ट, स्वर्णशिखा, मंजू कक्कड, योगेश कुमार, सुनीता नौडियाल, मुकेश वशिष्ठ कुलदीप सैनी मनीष श्रीवास्तव, मांगेराम मौर्य, डा संतोष चमोला आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही,
आज का दिन आंदोलन और सरकार दोनों के लिए निर्णायक साबित हुआ।
महिला शिक्षिकाओं की ताकत ने प्रशासन को हिला दिया। पुलिस और शिक्षकों के बीच हुई झड़प ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया। भारी संख्या में पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी भी शिक्षकों के आक्रोश को नहीं रोक पाई । प्रदेश स्तरीय नेताओं से वार्ता जारी । प्रशासन हालत संभालने पर जुटा ।





